Tuesday, 30 June 2015

बरखा आई रे





आतप ताप  गया, झंझावत और धूल।
आग उगलता सूरज छिपा जो चुभता जैसे शूल।
सर - सर पवन झकोरे झूम - झूम  आये।
घन घनघोर घटा घुमड़ - घुमड़ छाये।
नाचे मन मोरा चले  पुरवाई  रे।
बरखा आई  रे, बरखा आई  रे।

बादल देख  मोर मन गाए नाचे मगन मगन ।
पिहु - पिहु पपीहा की , गर्जत घन घोर घननन।
दादुर की ताल पर झींगुर की झिंगुर - झिंगुर  ।
मेघ-राग छेड़े मेघा,  गर्जन की  सरगम ।
भू-लोक से सुर-लोक तक सावन  झड़ी लगाई रे।
बरखा आई  रे, बरखा आई  रे।

झर - झर  झरत मेघ, नवजल निर्मल।
मंद - मंद शीतल बयार, अम्बर अति उज्जवल।
सरिता, सर सराबोर सागर सम-धरा।
पल्लवित नवजीवन से पुलक पुञ्ज बसुन्धरा।
नव-अंकुरोँ  ने ली है  अंगड़ाई रे ।
बरखा आई  रे, बरखा आई  रे।

जुगुनू की  चमक चाँद चपला सी चमक रही।
अम्बर से धरती तक   दामिनि सी दमक रही।
हरित परिधान धान खतों ने ओढ़ा है।
इन्द्रधनुष  अम्बर में तोरण सा छोड़ा है।
फूल मुस्कराए  हर कली मुस्कराई रे ।
बरखा आई  रे, बरखा आई  रे।


खग, मृग, पतंग वृंद   अंग - अंग फूले है।
फुहार हार मुक्तन के ज्योँ सावन के झूले है।
वन - उपवन कुसुम कुसुमित गुंजित मधुकर वृन्द।
सरित , सरोवर, कुमुद, कुमुदिनी जैसे कवि के  छंद।
रसिक , रसाल , रसिक,  रस डूबे  महक रही अमराई रे ।
बरखा आई  रे, बरखा आई  रे।









Thursday, 25 June 2015

मेरे गाँव की पवन


कविता 

आज़ छूकर गई मेरे गाँव  की पवन, शीतल, सुगन्धित,प्यारी - प्यारी   पवन। 
 माँ की बाँहों के झूले  सी  झुलाती  पवन, माँ की लोरी सी  मीठी -मीठी  पवन। 
बचपन की अठ्खेलियोँ सी अल्लहड़ पवन, आज छूकर गयी मेरे गाँव  की पवन।  

मेरे गाँव की गलियों की खुशबू पवन, चंपा चमेली की  भीनी  खुशबू  पवन। 
अमराइयों से सन के सुहानी पवन,  तितलियोँ सी चञ्चल, चपल सी पवन।   
कोयल, मोर,  मिठ्ठू की बोली पवन, आज छूकर गई मेरे गाँव की पवन। 

गेंहू के खेतोँ सी लहराती पवन , सरसोँ के  सुन्दर सुमन सी पवन। 
कलकल   नदिया सी बहती पानी पवन,   सावन की सुहानी झड़ी सी पवन। 
पनघट पर गोरी की चुहल सी पवन, आज छूकर गयी मेरे गाँव की पवन। 

बसंत की बहती बयार सी  पवन,  भोर में चिड़ियोँ  के  मल्हार सी पवन।
शरद की गुनगुनी धूप  सी पवन ,  बरखा  में  बरसे बहार सी पवन  ।
चाँद की  चाँदनी सी शीतल पवन , आज छूकर गयी मेरे गाँव  की पवन
,
माँ  के आँचल  की  छाँव   सी पवन,  पिता  के दुलार सी दुलारी पवन।
मन्दिर की  आरती सी गुनगुनाती  पवन. गंगा गोदावरी सी पावन पवन।
श्रद्धा की जैसे मूरत पवन  आज छूकर गयी मेरे गाँव  की पवन

माँ का संदेशा  लायी पवन,   कुछ चुपके से संदेशा दे  गयी पवन।
प्यार से गले लगा गयी पवन, माँ के स्नेह सा चुम्मन दे गयी पवन।
माँ के आशीषोँ के झड़ी सी पवन , आज छू कर गयी मेरे गाँव की पवन।