Thursday, 25 June 2015

मेरे गाँव की पवन


कविता 

आज़ छूकर गई मेरे गाँव  की पवन, शीतल, सुगन्धित,प्यारी - प्यारी   पवन। 
 माँ की बाँहों के झूले  सी  झुलाती  पवन, माँ की लोरी सी  मीठी -मीठी  पवन। 
बचपन की अठ्खेलियोँ सी अल्लहड़ पवन, आज छूकर गयी मेरे गाँव  की पवन।  

मेरे गाँव की गलियों की खुशबू पवन, चंपा चमेली की  भीनी  खुशबू  पवन। 
अमराइयों से सन के सुहानी पवन,  तितलियोँ सी चञ्चल, चपल सी पवन।   
कोयल, मोर,  मिठ्ठू की बोली पवन, आज छूकर गई मेरे गाँव की पवन। 

गेंहू के खेतोँ सी लहराती पवन , सरसोँ के  सुन्दर सुमन सी पवन। 
कलकल   नदिया सी बहती पानी पवन,   सावन की सुहानी झड़ी सी पवन। 
पनघट पर गोरी की चुहल सी पवन, आज छूकर गयी मेरे गाँव की पवन। 

बसंत की बहती बयार सी  पवन,  भोर में चिड़ियोँ  के  मल्हार सी पवन।
शरद की गुनगुनी धूप  सी पवन ,  बरखा  में  बरसे बहार सी पवन  ।
चाँद की  चाँदनी सी शीतल पवन , आज छूकर गयी मेरे गाँव  की पवन
,
माँ  के आँचल  की  छाँव   सी पवन,  पिता  के दुलार सी दुलारी पवन।
मन्दिर की  आरती सी गुनगुनाती  पवन. गंगा गोदावरी सी पावन पवन।
श्रद्धा की जैसे मूरत पवन  आज छूकर गयी मेरे गाँव  की पवन

माँ का संदेशा  लायी पवन,   कुछ चुपके से संदेशा दे  गयी पवन।
प्यार से गले लगा गयी पवन, माँ के स्नेह सा चुम्मन दे गयी पवन।
माँ के आशीषोँ के झड़ी सी पवन , आज छू कर गयी मेरे गाँव की पवन।





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