काशी, मथुरा तेरे पद पंकज।
पूजा , आरती , मंत्र जाप सब।
तेरे आँचल में हैं, मंदिर और गुरुद्वारे ।
आशीष तेरे माँ, धरती स्वर्ग उतारे।
परम पुनीत तेरी पद रज, ज्यों रोली और चन्दन।
कोटि - कोटि बंदन माँ तुझको, कोटि - कोटि माँ बंदन। ----१
पूजा , आरती , मंत्र जाप सब।
तेरे आँचल में हैं, मंदिर और गुरुद्वारे ।
आशीष तेरे माँ, धरती स्वर्ग उतारे।
परम पुनीत तेरी पद रज, ज्यों रोली और चन्दन।
कोटि - कोटि बंदन माँ तुझको, कोटि - कोटि माँ बंदन। ----१
शीतल, मलयज पवन बहे ज्यों।
मरुभूमि में गंग - जमुन ज्यों।
अम्बर सा अनंत तेरा आँचल।
ज्यों वरद् हस्त मुझ पर हर पल।
एक प्यार की कोमल थपकी पर, मैं बार - बार बारुं जीवन।
कोटि - कोटि बंदन माँ तुझको, कोटि - कोटि माँ बंदन। ---२
हर श्वास - निःश्वास में तू ही माँ।
हर बिश्वास में माँ, अहसास में माँ।
तू ममता का उच्छल उदधि।
जीवन में जीवन की परधि।
तू है हर पग , डग , मग पर पल - पल आलम्बन।
कोटि - कोटि बंदन माँ तुझको, कोटि - कोटि माँ बंदन। ----३
ममता, करुणा की है मूरत तू।
भगवान तू ही , भगवान की सूरत तू।
है निश्छल प्रेम की धार तू ही।
है बसंत तू , बहार तू ही।
तेरे प्यार , दुलार का यह अटूट बंधन।
कोटि - कोटि बंदन माँ तुझको, कोटि - कोटि माँ बंदन। …… ४
भगवान तू ही , भगवान की सूरत तू।
है निश्छल प्रेम की धार तू ही।
है बसंत तू , बहार तू ही।
तेरे प्यार , दुलार का यह अटूट बंधन।
कोटि - कोटि बंदन माँ तुझको, कोटि - कोटि माँ बंदन। …… ४