पति को छुड़ा लाऊँ यमराज से सावित्री मैं हूँ।
देवोँ की पूज्या वेद माता गायत्री मैं हूँ।
मैं हूँ , लक्ष्मी , नारायणी , कमलासना कमला।
मैं हूँ , ज्ञान की देवी शारदा, विमला।
मैं ही , दुर्गा , काली , भवानी शक्ति हूँ।
मैं ही, ममता, करुणा, दया, और भक्ति हूँ।
मैं ही , राम , कृष्ण, गौतम , ईशु की जननी हूँ।
मैं ही , नर्मदा, गंगा, मन्दाकिनी , वैतरणी हूँ।
मैं ही, निमित्त हूँ संसार के बिस्तार का।
मुझसे ही है, प्रवाह संसार के सार का।
मुझसे ही पुष्पित पल्लवित हर जीवन, नवजीवन है।
अगर मैं हूँ तो तुम हो, मुझसे यह जीवन संजीवन है।
मैं चाहूँ तो त्रिदेव को पलने में झुला दूँ।
मैं बनकर गोपी गोविन्द को नाच नचा दूँ।
मैं मातृतुल्य आदरणीया, वंदनीया हूँ।
देवता बसते वहाँ , जहाँ पूजनीया हूँ।
मैं पद्मिनी हूँ , मुझे तुम, छू न सकोगे।
जौहर के तेज को सह न सकोगे
मैं नारी हूँ, नारी का सम्मान करो।
अपने नहीं , इसके अस्तित्य पर अभिमान करो।
अपने नहीं , इसके अस्तित्य पर अभिमान करो.
देवोँ की पूज्या वेद माता गायत्री मैं हूँ।
मैं हूँ , लक्ष्मी , नारायणी , कमलासना कमला।
मैं हूँ , ज्ञान की देवी शारदा, विमला।
मैं ही , दुर्गा , काली , भवानी शक्ति हूँ।
मैं ही, ममता, करुणा, दया, और भक्ति हूँ।
मैं ही , राम , कृष्ण, गौतम , ईशु की जननी हूँ।
मैं ही , नर्मदा, गंगा, मन्दाकिनी , वैतरणी हूँ।
मैं ही, निमित्त हूँ संसार के बिस्तार का।
मुझसे ही है, प्रवाह संसार के सार का।
मुझसे ही पुष्पित पल्लवित हर जीवन, नवजीवन है।
अगर मैं हूँ तो तुम हो, मुझसे यह जीवन संजीवन है।
मैं चाहूँ तो त्रिदेव को पलने में झुला दूँ।
मैं बनकर गोपी गोविन्द को नाच नचा दूँ।
मैं मातृतुल्य आदरणीया, वंदनीया हूँ।
देवता बसते वहाँ , जहाँ पूजनीया हूँ।
मैं पद्मिनी हूँ , मुझे तुम, छू न सकोगे।
जौहर के तेज को सह न सकोगे
मैं नारी हूँ, नारी का सम्मान करो।
अपने नहीं , इसके अस्तित्य पर अभिमान करो।
अपने नहीं , इसके अस्तित्य पर अभिमान करो.
bahut sahi kaha,nari to jag chuki hai,purush ko samajhna shesh hai.samay lag raha hai par adhik der nahi hai.
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