Saturday, 18 July 2015

बेटी

परिवार  का परिवार से सेतुबंध है   बेटी।
ममता, करुणा, प्रेम  सिन्धु है  बेटी।
लोक से परलोक तक आलोक है बेटी।
जीवन में पहली किरण है  भोर की  बेटी।

बेटी की किलकारियां गूंजती जिस घर है,

बेटी से हर घर, वास्तव में घर है।




धरती पर स्वर्ग का अहसास है बेटी।
जीवन में निश्छल प्रेम का बिश्वास है   बेटी।
तपती हुई धरती पर शीतल फुहार सी बेटी।
मरुस्थल में महकती बहार सी बेटी।

बेटी से माँ - बाप का प्यार अमर है,

बेटी से हर घर, वास्तव में घर है।




विधि के विधान का वरदान है बेटी।
हर हार की जीत का हार है बेटी।
मान और सम्मान, अभिमान है बेटी।
मानव को भगवान का उपहार है बेटी।

बेटी है तो घर मस्जिद है मंदिर है।

बेटी से हर घर, वास्तव में घर है।




जीवन में जीवन का संचार है बेटी।
संसार के बिस्तार का आधार है बेटी।
प्रेम का अटूट बंधन है बेटी।
हृदय के स्पंदन का स्पंदन है बेटी।

बेटी है तो मानव मर कर भी अमर है।

बेटी से हर घर, वास्तव में घर है।


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